Wednesday, July 18, 2007

माहोल कुछ इस तरह

हुज़ूर ...

आज कल हमारा नाम है
बातों का दाम है
लोगोंको हम से काम है
सच कहते हैं, ऊपर श्रीराम हैं ।

आदाब !

1 comment:

उन्मुक्त said...

हज़ूर,
हिन्दी (देवनागरी) में इतना अच्छा लिखते हैं। आगे और भी क्यों नहीं लिखते।
आदाब